एक कार्यक्रम के दौरान अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह एक हकीकत है, चाहे अयोध्या में कुछ भी बने।
बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनाए हुए काफी दिन बीत चुके हैं लेकिन यह मामला अभी भी पूरी तरह ठंडा नहीं पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट साफ कर चुका है कि विवादित जमीन पर भव्य राम मंदिर का निर्माण होना है। मुस्लिम पक्ष ने पुनर्विचार याचिका दायर भी कर दी है लेकिन उससे भी ज्यादा परेशानी कई बड़े नेताओं का भाषण देना है। कोई ना कोई बड़ा नेता बाबरी मस्जिद को लेकर बड़ा बयान देता रहता है। अकबरुद्दीन ओवैसी ने बीती रात एक बड़ा बयान बाबरी मस्जिद के लिए देकर राजनीति को चरम पर पहुंचा दिया है।
जानकारी के लिए बता दें कि देश की सर्वोच्च अदालत ने विवादित जमीन को लेकर फैसला रामलला के हक में दे दिया। 9 नवंबर 2019 का इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। अयोध्या मामला सदियों से चला आ रहा है। कोई भी देश की बड़ी पार्टी इस पर राजनीति करने से नहीं चूकती थी। दोनों पक्षों की तरफ से जब कोई समाधान नहीं निकला तो सुप्रीम कोर्ट ने इसका फैसला खुद सुनाया। सभी धर्मों के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान किया और देश में कहीं भी दंगा देखने को नहीं मिला लेकिन मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से नाखुश जरूर दिखा। इसलिए उन्होंने पुनर्विचार याचिका दायर करने की सोची।
एक कार्यक्रम के दौरान अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह एक हकीकत है, चाहे अयोध्या में कुछ भी बने। वहां पर एक मस्जिद थी, है और रहेगी। अकबरुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़ा है पर अचूक नहीं। ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरह वह भी फैसले से सहमत नहीं है।
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