अगर केंद्र में सत्ता की कुर्सी का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है जिसने यूपी फतह कर लिया उसके दिल्ली में सरकार बनाने की संभावनाएं ज्यादा बनी रहती हैं। बता दें कि बीजेपी ने साल 2014 में यूपी की 80 में से 71 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी और आज के मौजूदा समीकरणों को देखा जाए तो बीजेपी के लिहाज से समीकरण तो सही बैठ रहे हैं। लेकिन कांग्रेस का जनाधार यूपी से लगभग खत्म सा हो गया है यही एक वजह भी है कि सपा-बसपा के गठबंधन में कांग्रेस को जगह नहीं मिली है। पार्टी के लिए यूपी चुनाव अस्तित्व का सवाल बन गया है। पार्टी हाशिये पर है और जनता को यूपी की राजनीति में कांग्रेस पार्टी से प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के अलावा शायद किसी और नाम के बारे में पता भी ना हो। ऐसे में कांग्रेस ने प्रियंका को पूर्वी यूपी का महासचिव बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी है।
प्रियंका के कांग्रेस महासचिव बनने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं का जोश जरूर चार गुना हो गया है। लेकिन प्रियंका के लिए यूपी भेदना इतना आसान नहीं रहने वाला इसीलिए तो प्रियंका ने अपने मिशन पूर्वी यूपी से पहले लखनऊ में अपना शक्ति प्रदर्शन दिखाकर दम भरा है। बात अगर पूर्वी यूपी के समीकरणों की करें तो पूर्वी यूपी में 80 में से 42 सीटें आती हैं। 2014 के चुनाव में तो कांग्रेस 80 में से महज 2 सीटें जीत पाई थी लेकिन कभी जमाने में पूर्वी यूपी में कांग्रेस का दबदबा रहता था। साल 2009 की ही बात करें तो कांग्रेस ने 18 सीटें पूर्वी यूपी से जीती थी। इसी पूर्वी यूपी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वाराणसी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर संसदीय सीट भी आती है इसलिए प्रियंका की राह आसान तो कतई नहीं होने वाली ।
हालांकि प्रियंका गांधी ने अपने लखनऊ दौरे से पहले रविवार को एक ऑडियो टेप भी जारी किया था। जिसके जरिये इतना तो तय है कि कांग्रेस महिलाओं, किसानों और युवाओं को अपनी ओर करने की पूरी कोशिश कर रही है, और इन्हीं के सहारे सपा-बसपा गठबंधन के साथ बीजेपी के वोटबैंक में सेंधमारी की जुगत में लगी है। प्रियंका को मैदान में उतारकर कांग्रेस ने महिला वोट बैंक को अपनी ओर खींचने की कोशिश की है। साल 2009 की तरह किसानों को लुभाने के लिए कांग्रेस कर्जमाफी का सहारा तो जरूर लेगी। इसके अलावा अगर बात युवाओं करे तो युवाओं की बेरोजगारी यूपी में बड़ा मुद्दा है। आगामी समय में कांग्रेस इसको लेकर बड़ा ऐलान कर सकती है साथ ही राहुल गांधी ने युनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम योजना का ऐलान करके युवाओं को साधने की पूरी-पूरी कोशिश जरूर की है ।
प्रियंका गांधी की करें तो कहीं ना कहीं प्रियंका गांधी के सामने चुनौतियों की भरमार है। सबसे बड़ी चुनौती तो पार्टी के संगठनात्म ढ़ांचे को दोबारा खड़ा करने की होगी, क्योंकि यूपी में कांग्रेस का हाल आज सबके सामने है। इसके अलावा प्रियंका के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती मजबूत प्रत्याशी ढ़ूंढना होगी, क्योंकि यूपी में पार्टी के पास बड़ा चेहरा नहीं है ऐसे में मजबूत प्रत्याशी की तलाश प्रियंका के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन सकती है। अब देखना ये होगा की प्रियंका इन चुनौतियों का सामना कैसे करती है हारी बाजी को जीत बाजीगर बनकर प्रियंका विरोधियों पर प्रहार करेंगी या फिर चुनौतियों के तले दब जाएंगी। आधिकारिक जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रियंका के रिजल्ट का पता तो लोकसभा चुनाव के बाद ही चलेगा लेकिन उससे पहले प्रियंका कौन सी सियासी चाल चलेंगी ये देखना भी दिलचस्प होगा ।


No comments:
Post a Comment