नई दिल्ली। अगर हौसलों में उड़ान हो तो कुछ भी कर गुजरने का जज़्बा खुद बा खुद आ जाता है। इसी को साबित किया है। स्थानीय पीजी कॉलेज में बी०ए० की पढ़ाई करने वाली खुशबू ने क्योंकि जब खुशबू विद्यालय पहुंची तो विद्यालय प्रशासन को यह समझ नहीं आया कि वो परीक्षा कैसे देगी दरअसल खुशबू के दोनों ही हाथ नहीं हैं। पर जब उसने हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड की परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण पत्र दिया तो विद्यालय प्रबंधन ने इस बात के लिए उसका लिखने का टेस्ट भी लिया कि यह बीए जैसी पढ़ाई को पूरा कर भी पाएगी या नहीं। पर उसने विद्यालय में जब अपना हुनर दिखाया तो विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ राम भजन अग्रहरि ने उसका संपूर्ण खर्च उठाने का बीड़ा ले लिया।
बता दें कि उन्होंने बी०ए० में उसकी संपूर्ण फ़ीस भरी और अब जब वह एम०ए० की परीक्षा के अंतिम वर्ष की परीक्षा दे रही है। अगर विद्यालय के प्राचार्य उसकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठाते तो उसकी पारिवारिक हालत ऐसा नहीं थी कि वो उसकी पढ़ाई का खर्च उठाते शायद इस वजह से उसकी पढ़ाई अधूरी रह जाती। पिता श्याम-लाल मां निर्मला कुल छह भाई-बहनों में खूशबू अपने पिता की सबसे बड़ी औलाद है। वह जहां चार बहनों में सबसे बड़ी है वही इकलौता भाई हिमांशु और दीपांशू अभी पढ़ाई कर रहे हैं। हिमांशु जहां 6 क्लास में है वहीं दीपांशू अभी पढ़ाई का ककहरा सीख रहा है। पिता श्याम-लाल मज़दूरी करके अपने छह बच्चों का पालन पोषण करते हैं। उसके सभी बच्चे किसी न किसी क्लास में पढ़ाई कर रहे हैं। Read More

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