
भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए मौजूदा समय में किसी भी नागरिक को कम से कम पिछले 11 साल से भारत में रहना जरूरी है।
4 दिसंबर बुधवार के दिन मोदी सरकार की बैठक में पेश हुए नागरिकता संशोधन बिल को पास किया गया था। अब इसे बैठक में मंजूरी मिलने के बाद इस बिल को आज लोकसभा में पेश किया जाएगा। यह बिल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कुछ देर में ही संसद में पेश किया जाएगा। इस बिल के संसद मे पेश होने पर अनुच्छेद 370 और तीन तलाक के वक्त हुआ घमासान जैसा ही घमासान लोगों के बीच देखने को मिल सकता है। विपक्षी पार्टी इसका ज़ोरदार तरीके से विरोध कर रही है, जिस कारण संसद से सरकार के लिए इस बिल को पास करवाना आसान नहीं होगा।
अगर नागरिकता संशोधन बिल को लोकसभा द्वारा मंजूरी मिल जाती है, तो बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी धर्मों के शरणार्थियों को इस बिल के तहत उन्हें भारतीय नागरिकता की मंजूरी मिल जाएगी।
- मोदी सरकार द्वारा पेश बिल को सिटिजन अमेंडमेंट बिल, 2019 नाम दिया गया है। इस बिल के आने से सिटिजन एक्ट, 1955 में बदलाव हो सकते है।
- भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए मौजूदा समय में किसी भी नागरिक को कम से कम पिछले 11 साल से भारत में रहना जरूरी है।
- मोदी सरकार के इस बिल के तहत बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी धर्मों के शरणार्थियों के लिए भारतीय नागरिकता की मंजूरी देने की बात कही गई है। Read more
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