प्रवासी मजदूरों की सुन लो भाई, क्यों इनकी है शामत आई? दो भाईयों की लाचारी, अब तो सुनो बाबू सरकारी…
देशभर में लॉकडाउन होते ही दूसरे राज्यों में मज़दूरी करके अपना गुजर बसर करने वाले कुछ मज़दूर पैदल तो कुछ साइकिल या दूसरे साधनों से मिलों का सफर तय कर अपने-अपने घरों को जाते दिखाई दिए…किसी ने भी ना भूख देखी और ना ही चिलचिलाती धूप… उन्हें सिर्फ किसी तरह, बस किसी तरह अपने घर पहुंच जाना था… इनका कहना है जब मरना ही है तो अपने गांव में क्यों नहीं…ऐसी ही मजबूरी और लाचारी की एक तस्वीर यूपी के श्रावस्ती से सामने आई है जिसे देखकर आपकी भी आंखें नम हो जाएंगी…ये तस्वीर है हरिहरपुर रानी के पटना खरगौरा गांव के 4 भाईयों की… जिसमें एक भाई लोहिया आवास में अपने परिवार के साथ रहता है तो दूसरा कच्ची दीवार पर बने टीन शेड के एक कमरे में अपने परिवार के साथ गुजर-बसर कर रहा है… वहीं दो भाईयों दिनेश और सूरज के हिस्से में जगह के नाम पर एक छोटा सा कमरा आया… दोनों बारी-बारी से अपने परिवार के साथ इस घर में रहने के लिए आते जबकि दूसरा परिवार दूसरे राज्य में मजदूरी करके रोजी-रोटी इकट्ठा करता था, इस दौरान गांव में रहने वाला भाई रिक्शा चलाता था और लॉकडॉउन होने के बाद दोनों परिवार का इस छोटे से कमरे में कैसे गुजारा हो रहा है।
टीन शेड के एक कमरे में प्रवेश करते ही बायीं ओर शौचालय और तो दायीं ओर चूल्हा है… इसके ठीक सामने उनका बिस्तर लगा है। दो परिवारों के बीच पर्दे के लिए बीच में चारपाई खड़ी की गई है और इस पर कपड़े रखे गए हैं। चारपाई के दूसरी ओर सूरज के परिवार का बिस्तर लगा है, इसके सामने इनका चूल्हा है। बहरहाल दोनों भाइयों को Read More..
No comments:
Post a Comment