नई दिल्ली: बोफोर्स घोटालें में 64 करोड़ की घूस लेने के मामले को लेकर सीबीआई ने कहा कि हम इस मामले में आगे भी जांच शुरू रखेंगे। जांच एजेंसी ने बयान देने से कुछ घंटे पहले ही विशेष न्यायालय से अपनी वह याचिका वापस ले ली थी। जिसमें उसने मामले की आगे जांच किए जाने की मंजूरी मांगी थी। चीफ मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट नवीन कश्यप ने सीबीआई को याचिका वापस लेने की मंजूरी देते हुए कहा कि इसके लिए इजाजत की जरूरत नहीं थी। केवल हमें जानकारी दे देना ही काफी था।
बता दें कि इस मामले सीबीआई का कहना है कि आगे की कार्रवाई एजेंसी तय करेगी। सीबीआई और वकील अजय अग्रवाल ने इस मामले में आगे की जांच शुरू करने के लिए एक याचिका दायर की थी। जिसके बाद सीबाआई के वकील अनिल तंवर ने अदालत को बताया कि हम अपनी याचिका वापस लेना चाहते हैं। इस मामले में आगे की कार्रवाई जांच एजेंसी द्वारा तय की जाएगी।
वहीं अग्रवाल से भी इस मामले में कोर्ट ने सवाल किया तो उन्होंने भी याचिका वापस लेने की बात की। कोर्ट ने उन्हें भी इसकी इजाजत दे दी। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी। एजेंसी ने बताया कि निजी जासूस माइकल हेर्शमैन ने कुछ खुलासे किए थे, इसके बाद हमने ट्रायल कोर्ट में बोफोर्स मामले में आगे की जांच के लिए इजाजत मांगी थी। हालांकि, 8 मई को सुनवाई में चीफ मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कहा था, “जब आगे की जांच के लिए सीबीआई के पास स्वतंत्र अधिकार और शक्तियां मौजूद हैं, तब यह उसके खुद के विवेक पर निर्भर करता है कि क्या ऐसा करना जरूरी है। इस तरह की याचिका क्यों दायर की गई।’
इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई की तारिख 16 मई रख दी थी। सीबीआई का कहना है कि कानूनी सलाह लेने के बाद सीबीआई ने 16 मई को सीएमएम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की। इस मामले की जांच के लिए अदालत की इजाजत जरूरी नहीं है, केवल कोर्ट को जानकारी दे देना ही पर्याप्त है। नवंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें एजेंसी ने 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती दी थी।
साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में हिंदुजा बंधुओं एसपी, हिंदुजा, जीपी हिंदुजा, पीपी हिंदुजा और अन्य के खिलाफ लगे सभी आरोप खारिज कर दिए थे। 1986 में हथियार बनाने वाली स्वीडन की कंपनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को 155 mm की 400 तोपें सप्लाई करने का सौदा किया था। यह डील 1.3 अरब डॉलर की थी। स्वीडिश रेडियो ने सबसे पहले 16 अप्रैल 1987 में बोफोर्स में 64 करोड़ रुपए दलाली का खुलासा किया। इसे बोफोर्स घोटाला या बोफोर्स कांड के नाम से जाना जाता है। Read More

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