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Tuesday, May 14, 2019

एक ऐसा नेता जिसने ‘कटीली राजनीतिक शय्या’ पर लेटकर शिखर पर मुलायम को पहुंचाया



आज हम एक ऐसे राजनेता की बात करने जा रहे है जिसने अपने बड़े भाई को शिखर पुरुष बनाने में पूरा राजनीतिक जीवन ही समर्पित कर दिया। ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि जिस ऊंचाई पर आज मुलायम सिंह यादव है उसके पीछे शिवपाल की मेहनत और उनके जमीनी स्तर पर उतरकर काम करने से ही मुमकिन हो पाया है। तो चलिए आज हम बात करते है उसी किंगमेकर के बारे में जिसने मुलायम को देश का ‘नेता जी’ बना दिया।
शिवपाल सिंह यादव ये वही राजनेता है जिन्हें मुलायम सिंह यादव ने कभी ऊंगली पकड़ राजनीति में उतारा था। शिवपाल ने भी अपने बड़े भाई के लिए काफी कुछ किया। 70 के दशक में जब चंबल के बीहड़ जिले इटावा में राजनीति की राह आसान नहीं थी तो शिवपाल ने ही भाई मुलायम के लिए रास्ता तैयार किया था।
शिवपाल और मुलायम के बीच राजनीतिक रिश्ता
नेताजी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले शिवपाल यादव पार्टी की सारी जिम्मेदारी अपने कंधों पर संभालते थे। वे बड़े भाई मुलायम के साथ अपने बचपन से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे।
उन्होंने कई इलाकों में घूम-घूमकर गरीबों की मदद करना और उन्हें सुविधाएं मुहैया कराने का बीड़ा उठाया। मरीजों को अस्पताल पहुंचाना, थाना-कचहरी में गरीबों को न्याय दिलाने के लिए दिन रात एक कर देना। सही मायनों में अगर देखा जाए पार्टी विचारधारा से लोगों को जोड़ने का काम ग्राउंड लेवल पर शिवपाल ने ही किया है।
अपनी जवानी के दिनों में उन्होंने ने सोशलिस्ट पार्टी का शायद ही कोई कार्यक्रम छोड़ा हो। इसकी बड़ी वजह थी पार्टी में शिवपाल की तेजी से बढ़ी सक्रीयता। कभी नेताजी के चुनावों के पर्चें बांटने से शुरूआत करते हुए कैसे शिवपाल एक सक्रिय नेता की भूमिका में सामने आए यह समाजवादी पार्टी का इतिहास बयां करता है।
सपा में रहते शिवपाल यादव ने जितना कार्यकर्ताओं का ख्याल रखा, उतना किसी और नेता ने नहीं रखा। अखिलेश सरकार में मंत्री रहे तो ज्यादातर कार्यकर्ता उन्हीं से फरियाद करते थे। क्योंकि मुलायम सिंह यादव के साथ पार्टी की शुरुआत से हर जिले के बारंबार दौरे के चलते उन्हें जमीनी सच्चाई मालूम रहती थी।
शिवपाल जब बने पहली बार विधायक
1967 में जसवंतनगर से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मुलायम सिंह के राजनैतिक विरोधियों की संख्या काफी बढ़ चुकी थी। राजनैतिक द्वेष के चलते कई बार विरोधियों ने मुलायम सिंह पर जानलेवा हमला भी कराया।
यही वह समय था, जब हम शिवपाल सिंह और चचेरे भाई रामगोपाल यादव मुलायम सिंह के साथ आए। उन्होंने ने मुलायम सिंह की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभाली। शिवपाल ने 1988 में राजनीति में कदम रखा। Read More

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