भारत का सबसे खतरनाक हथियार जिससे देश के दुश्मन कांपते है वो ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है और इसको ब्रह्मोस कारपोरेशन बनाती है। ब्रह्मोस कारपोरेशन भारत और रूस का संयुक्त उपक्रम है जिसमे भारत की हिस्सेदारी 50.5% और रूस की 49.5% है। ये एक सुपरसोनिक मिसाइल है जिसकी वजह से ये रडार के पकड़ में नहीं आती और जब राडार इसे पकड़ता है तो देर हो चुकी होती है।
भारत के थल सेना और वायु सेना के पास ये मिसाइल ऑपरेशनल है, मतलब ये मिसाइल जमीन से जमीन पर, जमीन से पानी पर, पानी से पानी पर, और पानी से जमीन पर मार कर सकती है, अभी हवा से जमीन पर मार करने बाला ब्रह्मोस A का सुखोई विमान से सफल परिक्षण किया गया और कुछ ही दिन में ये मिसाइल वायु सेना में शामिल हो गया।
ये मिसाइल रुसी एंटी शिप मिसाइल P-800 Onikis पर आधारित है ये दूसरी भाषा में कहे तो उसका एक्सपोर्ट वर्जन है इस मिसाइल का इंजन और सीकर रूस आपूर्ति करता है और लॉन्चर, नेविगेशन और बॉडी इंडिया में बनता है।
ब्रह्मोस एजिस कॉम्बैट सिस्टम को भी मात देने में सक्षम है, जिसका इस्तेमाल अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों के जंगी जहाज करते हैं। चीन भी इसी तरह के एक सिस्टम 052D का इस्तेमाल करता है। इसकी खूबियों की वजह से इसे भारत का ब्रह्मास्त्र भी कहा जाता है।
भारत ने सुखोई लड़ाकू विमान से स्वदेशी तकनीक से विकसित सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को फायर किया जा सकता है। 40 सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों में मिसाइल इस लिए भी जोड़ा गया है क्योंकि जरूरत पड़ने पर लंबी दूरी से ही इसका इस्तेमाल दुश्मन के खिलाफ किया जा सके।
मिसाइल की मारक क्षमता
ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता 290 किलोमीटर है और यह 300 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री अपने साथ ले जा सकता है। मिसाइल की गति ध्वनि की गति से करीब तीन गुना अधिक है।
ब्रह्मोस दुनिया की पहली और एकमात्र सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसे नौसैनिक प्लेटफार्म से वर्टीकल और झुकी हुई दोनों अवस्था में प्रक्षेपित किया जा सकता है।
मिसाइल की रफ्तार
ब्रह्मोस मिसाइल की रफ्तार वर्तमान में 3700 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसे बढ़ाकर 12,340 किलोमीटर पति घंटा तक बढ़ाया जाएगा। ये कम ऊंचाई पर उड़ते हुए बगैर रडार की पकड़ में आए हमला बोलती है।



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