पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच रविवार को आखिरकार समझौता हो गया। आर्थिक तंगी की कगार पर पहुंच चुकी पाक सरकार को आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) ने 42 हजार करोड़ रुपए का बेल आउट पैकेज देने पर सहमति जताई है। पाक को यह रकम 39 माह के लिए दी जा रही है।
खबरों के मुताबिक राजस्व एवं आर्थिक मामलों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सलाहकार डॉ अब्दुल हफीज शेख ने कहा कि स्टाफ स्तर पर हुए इस समझौते को अभी वाशिंगटन में आईएमएफ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की औपचारिक मंजूरी मिलनी बाकी है।
अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद वाशिंगटन में आईएमएफ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स इस समझौते को मंजूरी देगा, जिसके बाद ही आर्थिक मदद का रास्ता पूरी तरह साफ हो पाएगा।
इमरान खान ने 2018 में आईएमएफ से संपर्क साधा था। उसके बाद कई दौर की वार्ता हुई। आईएमएफ ने पैकेज जारी करने के लिए बेहद कड़ी शर्तें रखी थीं। इस वजह से वार्ता कई बार बीच में अटकी।
खबरों के मुताबिक, पावर टैरिफ में बढ़ोतरी, टैक्स छूट खत्म करने जैसी शर्तों की वजह से पाकिस्तान के मध्यमवर्ग और निम्नवर्ग पर जरूरत से ज्यादा बोझ पड़ेगा जिससे इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ की लोकप्रियता छिन सकती है।
IMF के साथ समझौते पर तैयार होने से पहले इमरान खान ने शनिवार को ही इस डील पर चिंता जताई थी और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कंगाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए उसके सामने एक शर्त रखी है। इसके मुताबिक, पाकिस्तान को 2 साल में 700 अरब रुपए की टैक्स छूट वापस लेनी होगी। पाकिस्तान ने यह शर्त मान ली है। उसने टैक्स छूट को वापस लेने के लिए सहमति दे दी है।
आपको बता दें पाकिस्तान पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं विदेशी भुगतान के लिए धन की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान ने राहत पैकेज के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) के प्रतिनिधिमंडल के साथ तकनीकी रूप की चर्चा शुरू की थी।

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