
दुशमनों के मन में खौफ पैदा करने के लिए भारतीय नौसेना के बेड़े में पनडुब्बी INS खंडेरी को शामिल किया गया है।
भारतीय सेना की ताकत में लगातार इजाफा हो रहा है। चाहे बात थल सेना या वायू सेना की हो या फिर नौसेना की। हर क्षेत्र में सेना का शौर्य हमें देखने को मिल रहा है। इसी के चलते अब भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने और दुशमनों के मन में खौफ पैदा करने के लिए भारतीय नौसेना के बेड़े में पनडुब्बी INS खंडेरी को शामिल किया गया है। जो लगभग 12 हज़ार किमी की दूरी तक गहरे पानी में सफर कर सकती है। खंडेरी का मोटो है अखंड, अभेद्य और अदृश्य और इसी मोटो पर खंडेरी खरा उतरती है।
इससे पहले भी INS खंडेरी ने देश को अपनी सेवाएं दी है, साल 1968 में INS खंडेरी को कमीशंड किया गया था। साल 1971 की भारत-*पाकिस्तान की लड़ाई में इस सबमरीन को देश के पूर्वी सी बोर्ड पर तैनात किया गया था और फिर अक्टूबर 1989 में इसे डीकमीशंड कर दिया गया।
भारतीय नौसेना में कलावरी क्लास सबमरीन यानी पनडुब्बी आईएनएस खंडेरी शामिल हो गई है। नौसेना की ताकत को बढ़ाने के लिए आईएनएस खंडेरी को नौसेना 19 सितंबर को सौंप दिया गया था और 28 सितंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह खुद मुंबई में इसकी कमिंशनिग की।
Hon’ble Raskha Mantri, Shri Rajnath Singh commissions the second Submarine of Project 75 at ND(Mbi) today. @SpokespersonMoD @DefenceMinIndia @rajnathsingh @shripadynaik @PMOIndia
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आईएनएस खंडेरी दूसरी कलावरी क्लास सबमरीन यानी पनडुब्बी है। ये पनडुब्बी 6,7.5 मीटर लंबी 1,2.3 मीटर ऊंची और 1,565 टन वजनी है। इसमें लगभग 11 किलोमीटर लंबी पाइप फिटिंग है और लगभग 60 किलोमीटर की केबल फिटिंग की गई है। स्पेशल स्टील से बनी सबमरीन में हाई टेंसाइल स्ट्रेंथ है, जो अधिक गहराई में जाकर काम करने की क्षमता रखती है। खंडेरी पनडुब्बी 45 दिन तक पानी में रह सकती है। स्टील्थ टेक्नोलॉजी से यह रडार की पकड़ में नहीं आती और किसी भी मौसम में कार्य करने में सक्षम है।
350 मीटर तक की गहराई में जाकर दुश्मन का पता लगा सकती है सबमरीन

आईएनएस खंडेरी के भीतर 360 बैटरी सेल्स है। प्रत्येक बैटरी सेल्स का वजन 750 किलो के करीब है। इसके भीतर दो 1250 केडब्ल्यू डीजल इंजन है। आईएनएस खंडेरी 45 दिनों के सफर पर जा सकता है। इन्ही बैटरियों के दम पर आईएनएस खंडेरी 6500 नॉटिकल माइल्स यानी करीब 12000 किमी का रास्ता तय करना पड़ता है। ये सबमरीन 350 मीटर तक की गहरायी में भी जाकर दुश्मन का पता लगाती है। इसके टॉप स्पीड की बात करे तो ये 22 नोट्स है।
इस सबमरीन को साइलेंट किलर भी कहा जा सकता। इसके भीतर एडवांस वेपन है, जो युद्ध जैसे समय में आसानी से दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकता है। जैसे सबसे ज़रूरी इसके पीछे के हिस्से में चुम्बकीय प्रणोदन मोटर जिसकी तकनीक को फ्रांस से लिया गया है। इसकी वजह से इसके अंदर से आने वाली आवाज़ को बाहर नहीं आने दिया जाता। इससे दुश्मन के खोजी हवाई जहाज हो या सबमरीन या वॉर वेसल्स को इसकी जानकारी ठीक से नहीं मिल पाती है, इससे वो सबमरीन को पकड़ में आये बिना हमला करना उचित होता है। Read More

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