कुछ साल पहले टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने लोगों को मोबईल नंबर पोर्टबिलिटी की नई सौगात दी थी।
कुछ साल पहले टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने लोगों को मोबईल नंबर पोर्टबिलिटी की नई सौगात दी थी। जिसके तहत अगर किसी भी उपभोक्ता को अपने मोबइल नेटवर्क से को भी समस्या होती है तो वो आसनी से किसी अन्य नेटवर्क में अपना नंबर आसनी से पोर्ट करवा सकता है। लेकिन उस समय जो सुविधाएं दी गई थी उसमें अब ट्राई ने बदलाव कर ग्राहकों के लिए इस सुविधा का लाभ उठाना और भी ज्यादा आसान कर दिया हैं।
तो चालिए अब आपको बताते हैं कि आखिर 16 दिसंबर से ट्राई की तरफ से क्या-क्या बदलाव किए हैं।
पहले के मुकबाले अब सिम को पोर्ट करने में मात्र तीन दिन का समय लगेगा जिसमें पहले 5 दिन का समय लगता था। जिसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसके साथ ही ट्राई ने यूनीक पोर्टिंग कोड की भी प्रक्रिया में बदलाव किया है। ट्राई के लागू नए नियम के चलते अब यूजर का यूनीक पोर्टिंग कोड तभी जेनरेट होगा जब यूजर का नंबर को पोर्ट कराने योग्य होंगा। जो कि अब ट्राई के नए नियम से जुड़ी कई शर्तों पर निर्भर करेगा।

साथ ही दूसरी ओर अगर बात की जाए ट्राई के नए नियम की तो यह नियम पोस्ट-पेड यूजर्स पर भी लागू होते हैं। जिसके तहत अब एक यूजर अपना नंबर तब तक पोर्ट नही करा सकता जब तक वह अपना मौजूदा नेटवर्क की सारी बकाया राशि नहीं चुका देता तब तक वह अपना नंबर पोर्ट नहीं कर सकता।
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