राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने महाराष्ट्र के पालघऱ में हुई साधुओं की हत्या पर अफसोस जताते हुए उस पर सवाल उठाए हैं।

देश में कोरोना वायरस के खिलाफ जंग जारी है। लॉकडाउन के चलते सभी बड़े-बड़े उद्योग धंधे बंद हैं। अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। ऐसे में हर व्यक्ति इससे बचने की जुगत में है। कोरोना वायरस के खिलाफ जारी इस जंग के बीच कई लोग अपने फैंस या समर्थकों को लॉकडाउन का अनुपालन करने की अपील कर रहे हैं। तो वहीं इस बीच कई हिंसा की घटनाएं भी सामने आई। महाराष्ट्र के पालघऱ में हुई मॉब लिचिंग की घटना उन्ही में से एक है। पूरे देश में इस घटना के बाद रोष देखने को मिला था। संत समाज के कई लोगों ने इस घटना को बेहद निंदनीय बताया था। अब इस कड़ी में संघ प्रमुख मोहन भागवत का नाम भी जुड़ गया है।
पालघर में हुई मॉब लिचिंग की घटना पर उठाए सवाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने महाराष्ट्र के पालघऱ में हुई साधुओं की हत्या पर अफसोस जताते हुए उस पर सवाल उठाए हैं। मोहन भागवत ने कहा कि इस घटना पर लगातार बयानबाजी हो रही है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये घटना होनी चाहिए थी? क्या उन लोगों को कानून हाथ में लेना चाहिए था? ऐसे समय में पुलिस प्रशासन की क्या जिम्मेदारी बनती है? ये सोचने का विषय है।
क्या था पूरा मामला
दरअसल दोनों साधु अपने गुरु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सुरत जा रहे थे। 16-17 अप्रैल की दरमियानी रात को दोनों साधु अपनी कार से पालघर के कासा पुलिस स्टेशन के गडचिंचले गांव पहुंचे। जहां उन्मादी भीड़ ने दो साधुओं और उनके ड्राइवर को चोर डाकू समझकर उनपर हमला कर दिया। जिसके बाद पूरे संत समाज में इसके प्रति भारी रोष देखने को मिला।
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें – मोहन भागवत
पालघर में हुई घटना के अलावा कोरोना वायरस पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि कोरोना वायरस से हमें घर में रहकर ही लड़ाई लड़नी है। उन्होंने कहा कि जितना हो सके लोगों की सेवा करें। नियमों में रहकर कार्य करें। जितना हो सके घर में रहें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। खुद को सुरक्षित रखें औऱ बीमार न पड़े। तभी हम कोरोना से जंग जीत पाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि संघ ने 30 जून तक अपने सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं। Hindi News
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